कहने को देच्च तो बापू का है पर बापू के देच्च में हर जगह नाथू ही दिखते हैं। राष्ट्रपिता तो बापू हैं पर देच्च पर राज नाथुओं का है । नोट पर तो बापू हैं पर वोट के लिए लड़ने वाले नाथू हैं। स्वराज तो बापू ने पा लिया पर देच्चवासियों को सुराज कब मिलेगा ?
चुनाव आ रहे हैं और हमेच्चा की तरह नाथू कमर कसे तैयार हैं। इस बार फिर बापू की हत्या जो करनी है। कहीं निच्चाना चूक न जाए। नाथुओं का नारा है देच्च के विकास का वादा और काम है सारा माल अन्दर करना।
बन्दूक में गोलियां तो बहुत हैं पहचानना है कौन सी गोली है बापू के सीने को छलनी करने के लिए। वो गोली आरक्षण, राम सेतु, न्यूक्लियर डील की हो या फिर धूम्रपान की नयी चमकती गोली। और भी बहुत सी गोलियां है।
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जब आया तो सभी दलों के नाथुओं के चेहरों पर कहीं खुच्ची तो कहीं गम दिख रहा था। एक तरफ आरक्षण देकर पिछड़ों का साथ मिला पर सामान्य का साथ कैसे छोड़ें। तो एक बड़े प्रदेच्च की मुख्यमंत्री ने केंद्र में आने पर सवर्णों को आरक्षण देने का वादा किया। आरक्षित वर्ग में क्रीमी लेयर पर दबंगों का असर इतना है कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहें हैं वैसे-वैसे क्रीमीलेयर की सीमा बढ़ती ही जा रही है। अब तो ३५ हजार महीना से ज्यादा कमाने वाला भी मलाई दार तबके के दायरे से बाहर हो गये हैं। क्या इतनी आमदनी वाले को आरक्षण के दायरे में रखना सही है ? बिल्कुल सही है। अगर वो दायरे से बाहर होंगे तो उनका वोट भी किसी और का होगा। सुप्रीम कोर्ट ने तो अपना काम पहले कर दिया लेकिन बाद में दबंगों के असर ने उसके किए करार पर पानी फेर दिया। दरअसल, क्रीमीलेयर वालों को तो आरक्षण की आवच्च्यकता ही नहीं है। इससे नुकसान ओबीसी मे ही ज्यादा पिछड़े लोगों का होना है। बापू के देच्च में जाली प्रमाण पत्र बनाना बहुत आसान है, ज्यादा तर ऐसे फर्जी पत्र बापू की तस्वीर के नीचे ही तैयार किये जाते हैं काले कोट वाले नाथुओं की दुकान में। यह वोट लेने के लिए छलावे के अलावा और कुछ नहीं है।
देच्च के भले के नाम पर न्यूक्लियर डील पर मुहर लग गई, कुछ नाथू खुच्च हुए तो कुछ इस डील के खिलाफ। वास्तव में इस डील से किसका भला होगा यह बता पाना अभी मुच्च्िकल है। इन सब के साथ और भी कई गोलियां हैं। सेतुसमुद्रम वाली गोली को लाने से मामला खराब हो सकता है इसलिए जब जरूरत पड़ेगी तभी उसे तमन्चे में डालेंगे।नाथुओं की नीति है एक गोली ठण्डे बस्ते में तो नई गोली तमन्चे के अन्दर। नई चमचमाती गोली का नाम है सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध। यह गोली तो सच में बापू के नच्चा रोधी देच्च को बनाने का सपना साकार करेगी। सब खुच्च हैं। खास तौर पर खाकी वर्दी वाले नाथू। उनकी रोज की आमदनी जो बढ़ जायेगी। सरकार ने दुपहिया वाहन वालों को हेलमेट पहनना जरूरी कर दिया तो खुच्ची इन्हें ही हुई थी। एक बकरे से ५०-१०० रुपये की कमाई जो होती थी। अब एक बकरा एक बीड़ी के बदले कम से कम एक बीड़ी तो दे ही देगा। बकरा ज्यादा शौकीन हुआ तो नाथुओं के ५-१० रुपये कहीं नहीं गये। एक माणिक चंद का तो जुगाड़ हो ही जायेगा। कुछ भी हो जाये यह कानून लागू हो पाएगा तो सिर्फ कागजों पर या मंत्रालय की फाइलों में। इससे जनता भी खुच्च, नच्चेड़ी भी खुच्च और वर्दी वाले नाथू भी खुच्च। इन सबको खुच्च करने के बाद नाथुओं को मिलने वाले वोटों की गिनती में कमी नहीं हो सकती।
ये बातें तो रहीं गोलियों की। अब बात करें बापू के सीने पर गोली चलाने वाले हाथों की। आज चारो तरफ गोडसे ही गोडसे हैं और बीच में हैं बेचारे बापू। साभी नाथू तो आपस में लड़ रहें हैं पर इस लड़ाई में बापू बलि का बकरा बन रहे हैं। हर बार जो होता आया है क्या इस बार भी वही होगा नाथू जीतेगा और बापू की हत्या कर देगा। इस बार वही हाथ बापू की हत्या करेंगे जो चुनाव में तीन तिकड़म से ज्यादा लूटने की कोच्चिच्च करेंगे। हमेच्चा से यही तो होता आया है। जो जीता उसी ने बापू की हत्या की, बापू के उसूलों की हत्या की। बापू भी सोचते होंगे उनकी गलती क्या थी ? क्या देच्च को आजादी दिलाना कोई अपराध था। आज देच्च फिरंगियों से तो आजाद है पर देच्च में घूम रहे नाथुओं से कब आजाद हो पाएगा। हो पाएगा भी कि नहीं।
Tuesday, October 21, 2008
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20 comments:
hello varun
मैं आपकी भावनाओं की कद्र करता हूँ. आपने अपने मनोभाव बहुत ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किए है. लेकिन मुझे यह लेख एकतरफा लगा, ऐसा लगा की यह सिर्फ़ आपका अपना व्यक्तिगत मत है. मैं कई ऐसे लोगों को जानता हूँ जो नाथूराम को बुरा नही मानते.
आप लिखते रहिये, आपको पढ़ कर अच्छा लगा. थोड़ा हिन्दी की टाइपिंग पर भी गौर फरमाइए कुछ कुछ गलतियां हुई है आपके लेख में.
आपका मित्र
मनुज मेहता
और हाँ एक रोचक बात जो मैं लिखना चाहता था, आपका ब्लॉग है हिन्दुस्तानी खून और आपने तस्वीर किसी फिरंगी की लगा राखी है. मैं इसका मतलब समझ नही पाया.
मैं शक नहीं करना चाहता...पर येसा भी नहीं है. साथ ही मेरा भी वही सवाल है; जो मनुज मेहता जी का है; कृपया सुलझाएं;
---
लिखते रहिये. धन्यवाद.
नाथूराम गोडसे की पुस्तक:-
'मैंने गांधी को क्यों मारा'
आप जरूर पढ़ें.......
ये जो वोटों की राजनीति करते हैं वे तो नाथूराम से भी बुरे हैं । मुझे लगता है कि आप आधे देसी हैं तभी हिंदुस्तानी खून लिखा है । और आप हिंदी जानते हैं पर रोमन स्क्रिप्ट से लिखते है ।
ठीक चल रहा है । आज देखा आपका ब्ला'ग
बहुत अच्छा लिखा है आपने.आपने जो आरक्षण की बात कही उससे पूर्णतः सहमत हूँ.परन्तु,नाथूराम गोडसे ने गांधी को क्यों मारा ? इस प्रश्न के उत्तर के लिए एक बार नाथूराम के दृष्टिकोण को भी देख लें.गांधी महान थे,महापुरुष थे,इसमे कोई शक नही,पर कहीं कहीं उनसे जो गलतियाँ हुईं उसका प्रतिफल हम आज भी भुगत रहे हैं.
पूरे आलेख में मैंने गौर किया की आपका '' श " सही नही लिखा हुआ है.आप जब रोमन में टाइप करते हैं तो श के लिए sh स्पेलिंग का इस्तेमाल कर देखें.संभवतः इससे आप ष,श बड़े आराम से लिख पाएंगे.
tarif ke liya shukrya
apke blogf ko padhkar kushi hui
वाह वरूण जी अच्छा लेख लिखा हे आपने पढकर अच्छा लगा लेकिन एक बात जो मनुज जी ने उठाई है वो मेरी समझ से परे है तो थोडा इस बात पर भी प्रकाश डालो कि हिंदुस्तानी ब्लाग पर फिरंगी क्यों जरूर बताना
बाकी अच्छा लगा और आपने एक पोस्ट में कई पहलुओ पर ध्यान केंद्रित किया और कराया उसके लिए धन्यवाद
अच्छा प्रयास है जी। पर आपके ब्लॉग पर दूरगामी यातायात तो आपकी आइडेण्टिटी से मिलेगा। किसी विदेशी की नहीं!
मैं शक नहीं करना चाहता...पर येसा भी नहीं है. साथ ही मेरा भी वही सवाल है; जो मनुज मेहता जी का है; कृपया सुलझाएं;
very gud, दीपावली की हार्दिक शुबकामनाएं
बहुत अच्छा है...... बधाई,
आपको, परिवार सहित दीपावली की शुभकामनायें......
आपका लेख पढ़कर अच्छा लगा। लेकिन योगेंद्र मोदगिल की राय भी जरुर मान लिजिये शायद मन की कुछ शंकाए खत्म हो जाए।
आज आप के ब्लॉग पर आया...सबसे पहले तो आप फिरंगी को अपने यहाँ से हटायें...जब आप के पास अपना चेहरा है तो किसी और का क्यूँ लगाना? अच्छा लगा आप को पढ़ कर. देश के नौजवान जब इतनी सार्थक सोच रखेंगे तभी हम प्रगति कर पाएंगे...लिखते रहिये.
नीरज
वरुण जी आपके ब्लॉग पर आना सुखद लगा.....फिरंगी की फोटो के पीछे की सोच भी कबीले तारीफ है .....ब्लॉग को पुरा नही पड़ सकी लेकिन जरुर पडूँगी .......एक बात और ....आप की अखबार से हैं......
प्रियवर
आपने अपनी बात अच्छी तरह रखी पर आप ये सोचें कि ये बातें पूर्वाग्रह ग्रसित भी हो सकती हैं
क्योंकि हमेशा से बहुत ज़रूरी नहीं है कि सारे सच सबके सामने रखे गएँ हों .
फ़िर भी लोकतंत्र में स्वस्थ परम्परा होगी यदि सब लोग आपकी तरह बेबाकी से अपने विचार रखें .
एक अनुरोध और ; अगर आपको लगता है कि फिरंगी की तस्वीर आपके ब्लॉग पर होनी चाहिए तो उसे ज़रूर रखें .
लेकिन अगर सब लोगों का मानना है कि एक अच्छे देशवासी की [ यानी आपकी ]तस्वीर होनी चाहिए तो उसे भी लगा लीजिये .
जिसको जो चाहिए वो उसे देख लेगा .
कहां फंसे हुये हो भाई >? नयी पोस्ट कब ?
bhaai naturam se kya vyaktigat dushmani hai.nathuram ne gandhi ki hatya nahi ki balki uska vadh kiya tha. kyon kiya ?karan jaanne ke liye mere blog par aaye.
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